दोस्तों, आज के ज़माने में जब सब कुछ इतनी तेज़ी से बदल रहा है, क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी कंपनियाँ और हम खुद कैसे आगे बढ़ते रहेंगे? मैंने अपनी आँखों से देखा है कि जो लोग वक्त के साथ अपनी स्किल्स को तराशते नहीं, वे चाहे कितनी भी मेहनत क्यों न करें, कहीं न कहीं पीछे छूट जाते हैं.
यह सिर्फ नौकरी बचाने की बात नहीं है, बल्कि भविष्य के अवसरों को भुनाने और अपने करियर में नई ऊँचाईयों को छूने का सवाल है. खासकर जब AI और डिजिटल दुनिया हर दिन नया रूप ले रही है, तो हमें अपने कर्मचारियों को स्मार्ट बनाना होगा.
यह सिर्फ कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक कोशिश होनी चाहिए, ताकि हर कोई इस बदलती दुनिया में खुद को फिट रख सके. इस बदलती दुनिया में, कर्मचारियों को सिर्फ नए काम सिखाना ही काफी नहीं, बल्कि उनकी पुरानी स्किल्स को अपग्रेड करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना भी उतना ही ज़रूरी है.
सोचिए, साल 2030 तक 39% कोर स्किल्स बदल जाएँगी! ऐसे में अगर हम आज से ही सीखने और सिखाने पर ध्यान नहीं देंगे, तो ये बदलाव हमारे लिए चुनौती बन जाएँगे. मैंने खुद महसूस किया है कि निरंतर सीखना और खुद को अपडेट रखना कितना फायदेमंद हो सकता है.
यह हमें सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए भी तैयार करता है. तो चलिए, आज इसी खास विषय पर थोड़ी गहराई से बात करते हैं. below the article let’s know in detail.
बदलते दौर में अपने हुनर को निखारना क्यों ज़रूरी है?

आज की दुनिया में सीखने का महत्व
दोस्तों, मैंने अपनी आँखों से देखा है कि दुनिया कितनी तेज़ी से बदल रही है! आज से कुछ साल पहले जो हुनर हमें राजा बनाता था, आज वो सिर्फ एक याद बनकर रह गया है.
अगर हम खुद को अपडेट नहीं करेंगे, तो ये बदलाव हमें कहीं पीछे छोड़ देगा. खासकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई डिजिटल तकनीकें हर दिन कुछ नया लेकर आ रही हैं, तो हमें अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बढ़ाना होगा.
यह सिर्फ नौकरी बचाने की बात नहीं है, बल्कि नए अवसरों को पहचानने और अपने करियर में एक नई उड़ान भरने की बात है. जैसे एक नदी हमेशा बहती रहती है, हमें भी सीखने की इस धारा में बहते रहना होगा.
जो रुक गया, वो ठहर गया. आज का समय हमें सिखाता है कि सीखना कभी बंद नहीं होता, यह एक सतत प्रक्रिया है. मुझे याद है, मेरे एक दोस्त ने शुरुआत में नई तकनीकें सीखने से मना कर दिया था, और नतीजा ये हुआ कि वो अपने ही साथियों से काफी पिछड़ गया.
वहीं, दूसरे दोस्त ने मेहनत की, नए सॉफ्टवेयर सीखे और आज वो कंपनी में एक लीडर है. ये फर्क मैंने अपनी आंखों से देखा है और महसूस किया है.
पुरानी लकीर पीटने से होगा नुकसान
एक पुरानी कहावत है, “वक्त के साथ नहीं बदलोगे तो वक्त तुम्हें बदल देगा.” ये बात आज के वर्कप्लेस पर बिल्कुल सही बैठती है. अगर हम सोचते हैं कि जो हमने स्कूल या कॉलेज में सीखा, वो जिंदगी भर काम आएगा, तो शायद हम खुद को धोखा दे रहे हैं.
दुनिया इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि आज के कौशल 2030 तक 40% तक पुराने हो सकते हैं. ज़रा सोचिए, अगर आप आज भी वही काम पुराने ढर्रे पर कर रहे हैं, तो क्या आप भविष्य के लिए तैयार हैं?
मुझे लगता है, नहीं! कंपनियां भी अब ऐसे लोगों को ढूंढ रही हैं जो न सिर्फ आज के काम में माहिर हों, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार हों.
हाल ही में आई रिपोर्टों में बताया गया है कि AI स्किल्स की मांग भारत में तेज़ी से बढ़ रही है, और सितंबर 2025 में AI और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में नौकरियों में 61% की वृद्धि हुई है.
अगर हम इस मौके का फायदा नहीं उठाएंगे, तो कहीं न कहीं नुकसान हमारा ही होगा.
नई पीढ़ी को तैयार करने की हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी
कंपनियों को आगे बढ़कर पहल करनी होगी
मुझे लगता है कि केवल कर्मचारियों पर ही सारा बोझ डाल देना ठीक नहीं है. कंपनियों की भी ये जिम्मेदारी है कि वे अपने कर्मचारियों को नए कौशल सिखाएं और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करें.
मैंने देखा है कि कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के विकास में निवेश करती हैं और इसका फायदा उन्हें खुद मिलता है. इससे न केवल कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि वे कंपनी के प्रति ज़्यादा वफादार भी महसूस करते हैं.
जब एक कंपनी अपने लोगों को आगे बढ़ने का मौका देती है, तो कर्मचारी दिल से काम करते हैं. TCS, इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां AI फर्स्ट ऑपरेशन मॉडल के तहत कर्मचारियों की स्किल्स को अपडेट कर रही हैं, और यह दिखाता है कि इस दिशा में पहल कितनी ज़रूरी है.
यह सिर्फ पैसे लगाने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाने की बात है जहाँ सीखना और सिखाना रोज़मर्रा का हिस्सा बन जाए. एक बार मैंने एक स्टार्टअप के सीईओ से बात की थी.
उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने हर कर्मचारी को हर महीने 4 घंटे नई स्किल सीखने के लिए दिए, और 6 महीने बाद उनकी टीम की उत्पादकता में 20% का उछाल आया.
ये होती है असली दूरदर्शिता!
हर कर्मचारी का अपना योगदान
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ कंपनियां ही सब कुछ करें. हम कर्मचारियों की भी अपनी जिम्मेदारी बनती है. हमें खुद भी नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहना होगा, पहल करनी होगी.
कभी-कभी हमें लगता है कि “मैं तो सब जानता हूँ,” और यही हमारी सबसे बड़ी गलती होती है. मैंने अक्सर देखा है कि जो लोग खुद से सीखते रहते हैं, सवाल पूछते हैं और नए अनुभवों के लिए तैयार रहते हैं, वे हमेशा आगे बढ़ते हैं.
वे न सिर्फ अपने करियर में सफल होते हैं, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी प्रेरित करते हैं. जैसे, जब मैंने पहली बार वीडियो एडिटिंग सीखी थी, तो मुझे लगा था कि यह कितना मुश्किल होगा, लेकिन मैंने ठान ली थी.
आज मैं अपने ब्लॉग के लिए खुद वीडियो एडिट कर पाता हूँ, और मुझे इस पर बहुत गर्व है. यह दिखाता है कि थोड़ी सी कोशिश और सीखने की लगन हमें कहाँ से कहाँ पहुँचा सकती है.
सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, सतत विकास का मंत्र
अपस्किलिंग और रीस्किलिंग: भविष्य की तैयारी
आज के समय में सिर्फ एक बार ट्रेनिंग ले लेना काफी नहीं है. हमें लगातार खुद को ‘अपस्किल’ और ‘रीस्किल’ करते रहना होगा. ‘अपस्किलिंग’ का मतलब है अपने मौजूदा हुनर को और बेहतर बनाना, उसे नई तकनीकों के हिसाब से ढालना.
और ‘रीस्किलिंग’ का मतलब है बिल्कुल नए कौशल सीखना, जो भविष्य में काम आएं. सोचिए, जब मैंने अपना ब्लॉग शुरू किया था, तो मुझे सिर्फ लिखने का शौक था. लेकिन धीरे-धीरे मुझे SEO, डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के बारे में सीखना पड़ा.
ये सब मेरी ‘अपस्किलिंग’ थी. फिर जब AI ब्लॉगिंग का ट्रेंड आया, तो मुझे AI टूल्स को समझना पड़ा, जो मेरे लिए एक तरह की ‘रीस्किलिंग’ थी. इन दोनों ही प्रक्रियाओं ने मुझे आज यहाँ तक पहुँचाया है.
भारत में स्किल डेवलपमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप मंत्रालय ने 2025 तक भारत को उच्च कौशल संतुलन में बदलने का लक्ष्य रखा है, जो यह दिखाता है कि ‘अपस्किलिंग’ और ‘रीस्किलिंग’ कितनी महत्वपूर्ण हैं.
सीखने की संस्कृति कैसे बनाएँ?
किसी भी संगठन में, या यहाँ तक कि अपने घर में भी, एक ऐसी संस्कृति बनाना बहुत ज़रूरी है जहाँ हर कोई सीखने के लिए प्रोत्साहित हो. यह सिर्फ औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से नहीं होता, बल्कि एक-दूसरे से सीखने, गलतियाँ करने और उनसे सीखने की आज़ादी से होता है.
मैंने अपनी कंपनी में एक ‘लंच एंड लर्न’ सेशन शुरू किया था, जहाँ हर हफ्ते कोई एक कर्मचारी अपनी नई सीखी हुई चीज़ों को दूसरों के साथ शेयर करता था. इसका जादू ऐसा चला कि कुछ ही महीनों में हर कोई कुछ न कुछ नया सीखने लगा.
इससे न केवल ज्ञान बढ़ा, बल्कि टीम के सदस्यों के बीच का रिश्ता भी मजबूत हुआ. ऐसी छोटी-छोटी पहलें बहुत बड़ा बदलाव ला सकती हैं, और यही सच्ची सीखने की संस्कृति है.
AI और डिजिटल युग में हुनरमंद बनने के फायदे
व्यक्तिगत विकास और करियर में उछाल
जब आप AI और डिजिटल कौशल सीखते हैं, तो यह सिर्फ आपकी नौकरी के लिए ही नहीं, बल्कि आपके व्यक्तिगत विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. मैंने खुद महसूस किया है कि नए कौशल सीखने से आत्मविश्वास बढ़ता है, सोचने का तरीका बदलता है, और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता बेहतर होती है.
आप अपने करियर में नई ऊँचाईयों को छू सकते हैं. आजकल AI से जुड़ी नौकरियों की मांग भारत में तेज़ी से बढ़ रही है, जैसे डेटा एनालिटिक्स, AI और मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, और साइबर सुरक्षा.
अगर आप इन क्षेत्रों में खुद को कुशल बनाते हैं, तो आपके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं होगी. मुझे आज भी याद है जब मैंने पहली बार एक जटिल डेटा सेट का विश्लेषण AI टूल का उपयोग करके किया था, मुझे लगा जैसे मैंने कोई जादुई शक्ति हासिल कर ली हो!
यह अनुभव अविश्वसनीय था और मेरे अंदर नई ऊर्जा भर गया.
कंपनियों के लिए गेम चेंजर
कंपनियों के लिए भी AI और डिजिटल रूप से कुशल कर्मचारी किसी गेम चेंजर से कम नहीं होते. ऐसे कर्मचारी न केवल उत्पादकता बढ़ाते हैं, बल्कि नवाचार को भी बढ़ावा देते हैं.
वे नई चुनौतियों का सामना करने और बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करते हैं. जब एक कंपनी के पास एक मजबूत और कुशल टीम होती है, तो वह किसी भी मुश्किल को आसानी से पार कर सकती है.
रिपोर्टों से पता चलता है कि AI कौशल की मांग इंजीनियरिंग (औद्योगिक, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल) जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ रही है, और यह कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है.
असली बदलाव लाने वाले तरीके

इंटरैक्टिव वर्कशॉप और ऑनलाइन कोर्सेज
कौशल विकास के लिए आज कई प्रभावी तरीके मौजूद हैं. मैंने देखा है कि इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स और ऑनलाइन कोर्सेज सबसे ज़्यादा फायदेमंद साबित होते हैं. इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स में हमें सीधे अनुभव मिलता है, हम सवाल पूछ सकते हैं और वास्तविक दुनिया की समस्याओं पर काम कर सकते हैं.
ऑनलाइन कोर्सेज की तो बात ही अलग है, आप घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार सीख सकते हैं. Coursera, Udemy, edX जैसे प्लेटफॉर्म पर हज़ारों कोर्सेज उपलब्ध हैं.
मैं खुद हमेशा इन प्लेटफॉर्म्स से कुछ न कुछ नया सीखता रहता हूँ. इन कोर्सेज से हमें सिर्फ ज्ञान ही नहीं मिलता, बल्कि प्रमाण पत्र भी मिलते हैं जो हमारे रिज्यूमे को और मजबूत बनाते हैं.
मेंटरशिप और पीयर लर्निंग का जादू
इसके अलावा, मेंटरशिप और पीयर लर्निंग (साथियों से सीखना) का जादू भी कम नहीं है. जब कोई अनुभवी व्यक्ति आपको मार्गदर्शन देता है, तो सीखने की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है.
मेंटरशिप हमें गलतियाँ करने से बचाती है और सही दिशा दिखाती है. वहीं, पीयर लर्निंग में हम अपने साथियों से सीखते हैं, उनके अनुभवों से फायदा उठाते हैं, और मिलकर समस्याओं का समाधान करते हैं.
मुझे याद है, मेरे करियर के शुरुआती दौर में एक मेंटर ने मुझे बहुत मदद की थी. उनकी सलाह ने मुझे कई मुश्किलों से बाहर निकाला और आज मैं जहाँ हूँ, उसमें उनका बहुत बड़ा हाथ है.
निवेश का फल: बेहतर टीम, बेहतर मुनाफा
खुश और सक्षम कर्मचारी
जब कंपनियां अपने कर्मचारियों के कौशल विकास में निवेश करती हैं, तो उन्हें इसका बहुत बड़ा फल मिलता है. सबसे पहले, उन्हें खुश और सक्षम कर्मचारी मिलते हैं.
एक खुश कर्मचारी वह होता है जिसे लगता है कि कंपनी उसके भविष्य के बारे में सोचती है. जब कर्मचारी सक्षम होते हैं, तो वे अपनी पूरी क्षमता से काम करते हैं, जिससे काम का माहौल बेहतर होता है और कंपनी की सफलता में चार चाँद लग जाते हैं.
मुझे खुद अनुभव है कि जब मुझे कोई नई स्किल सीखने का मौका मिलता है, तो मैं कितना उत्साहित महसूस करता हूँ. यह उत्साह सीधे तौर पर मेरे काम में झलकता है.
नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि
कौशल विकास से सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पूरी कंपनी को फायदा होता है. नए कौशल सीखने से कर्मचारी नए विचार लेकर आते हैं, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलता है.
साथ ही, उनकी उत्पादकता भी बढ़ती है क्योंकि वे काम को ज़्यादा कुशलता से कर पाते हैं. इससे कंपनी का मुनाफा भी बढ़ता है और वह बाज़ार में अपनी जगह बनाए रखती है.
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए लाखों कुशल कार्यबल की ज़रूरत होगी. यह दिखाता है कि कैसे कौशल विकास सीधे तौर पर आर्थिक वृद्धि और बड़े लक्ष्यों से जुड़ा है.
एक कदम आगे: भविष्य के लिए तैयार रहें
बदलती ज़रूरतों को समझना
भविष्य के लिए तैयार रहने का मतलब है कि हमें लगातार बदलते बाज़ार की ज़रूरतों को समझना होगा. आज जो कौशल महत्वपूर्ण हैं, कल वे बदल सकते हैं. इसलिए हमें भविष्य की ओर देखना होगा और उन कौशलों की पहचान करनी होगी जिनकी मांग बढ़ने वाली है.
यह एक ऐसा काम है जो कभी खत्म नहीं होता, ठीक वैसे ही जैसे एक माली अपने बगीचे का ध्यान रखता है, वैसे ही हमें अपने करियर के बगीचे का भी ध्यान रखना होगा.
अनुकूलनशीलता ही सफलता की कुंजी
अंत में, मैं यही कहूँगा कि अनुकूलनशीलता (Adaptability) ही सफलता की कुंजी है. जो लोग बदलते हालात के साथ खुद को ढाल लेते हैं, वे हमेशा आगे बढ़ते हैं. हमें सिर्फ नई चीज़ें सीखने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सोचने के तरीके को भी बदलने के लिए तैयार रहना होगा.
जब मैंने पहली बार AI को एक खतरे के बजाय एक अवसर के रूप में देखना शुरू किया, तो मेरे लिए चीज़ें बहुत आसान हो गईं. यह मानसिकता ही हमें भविष्य के लिए तैयार करती है और हमें एक सफल इंसान बनाती है.
| कौशल विकास का पहलू | लाभ | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत विकास | आत्मविश्वास बढ़ता है, करियर में प्रगति होती है | नई भाषा सीखना, पब्लिक स्पीकिंग |
| कंपनी के लिए लाभ | उत्पादकता बढ़ती है, नवाचार को बढ़ावा मिलता है | कर्मचारियों को AI टूल्स का प्रशिक्षण देना |
| भविष्य की तैयारी | बदलती तकनीक के साथ बने रहना | साइबर सुरक्षा या डेटा साइंस सीखना |
लेख का समापन
तो दोस्तों, जैसा कि आपने देखा, बदलते समय में खुद को अपडेट रखना कितना ज़रूरी है. यह सिर्फ नौकरी या पैसे कमाने की बात नहीं है, बल्कि अपने जीवन को एक नई दिशा देने और हर पल कुछ नया सीखने की बात है. मैंने अपने अनुभव से जाना है कि जो लोग सीखने से कतराते हैं, वे कहीं न कहीं अवसरों को खो देते हैं. मुझे उम्मीद है कि मेरे इस ब्लॉग पोस्ट ने आपको यह सोचने पर मजबूर किया होगा कि आप अपने हुनर को कैसे निखार सकते हैं और भविष्य के लिए खुद को कैसे तैयार कर सकते हैं. याद रखिए, सीखने का सफर कभी खत्म नहीं होता!
कुछ काम की बातें जो आपको पता होनी चाहिए
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अपने कौशल की पहचान करें: सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि आपके पास कौन से मौजूदा कौशल हैं और भविष्य में किन कौशलों की ज़रूरत होगी. बाज़ार के रुझानों पर नज़र रखें और उन क्षेत्रों को पहचानें जहाँ तेज़ी से विकास हो रहा है. इससे आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि कहाँ निवेश करना सबसे ज़्यादा फायदेमंद होगा.
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ऑनलाइन संसाधनों का लाभ उठाएँ: आज के डिजिटल युग में सीखने के अनगिनत अवसर मौजूद हैं. Coursera, Udemy, LinkedIn Learning जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर हज़ारों कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ तो मुफ्त भी हैं. मैंने खुद इन प्लेटफ़ॉर्म्स से बहुत कुछ सीखा है. ये आपको घर बैठे, अपनी सुविधानुसार सीखने का मौका देते हैं और आपको प्रमाण पत्र भी मिलते हैं, जो आपके करियर में चार चांद लगा सकते हैं.
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नेटवर्किंग है बहुत ज़रूरी: सिर्फ कोर्स करने से ही बात नहीं बनेगी. अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों और साथियों के साथ जुड़ें. सेमिनार, वेबिनार और वर्कशॉप में हिस्सा लें. मैंने पाया है कि अक्सर लोगों से बातचीत करके और उनके अनुभव सुनकर हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, जो किताबों में नहीं मिलता. यह न केवल आपको नई जानकारी देता है, बल्कि नए अवसरों के दरवाज़े भी खोलता है.
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AI को अपना दोस्त बनाएँ, दुश्मन नहीं: बहुत से लोग AI से डरते हैं, लेकिन यह समझने की ज़रूरत है कि AI एक टूल है, जो हमारे काम को आसान बना सकता है. इसे सीखने और इसका उपयोग करने से आप दूसरों से आगे निकल सकते हैं. मैंने खुद AI टूल्स का उपयोग करके अपने ब्लॉग की उत्पादकता में बहुत सुधार देखा है. इसे एक चुनौती के बजाय एक अवसर के रूप में देखें, और आप देखेंगे कि कैसे यह आपके काम को बदल देता है.
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निरंतर मूल्यांकन और अनुकूलन: सीखना एक सतत प्रक्रिया है. अपने सीखे हुए कौशलों का नियमित रूप से मूल्यांकन करें और देखें कि वे कितने प्रभावी हैं. अगर ज़रूरत पड़े, तो नए कौशल सीखने के लिए तैयार रहें और खुद को बदलते माहौल के हिसाब से ढालें. लचीलापन ही आपको हर परिस्थिति में सफल बनाएगा. मैं हमेशा खुद से पूछता हूँ, “आज मैंने क्या नया सीखा?” और यह सवाल मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.
ज़रूरी बातों का सार
दोस्तों, इस पूरे लेख का सार यही है कि आज की तेज़ बदलती दुनिया में स्थिर रहना पीछे हटने जैसा है. हमें लगातार खुद को ‘अपस्किल’ और ‘रीस्किल’ करते रहना होगा. यह व्यक्तिगत विकास, करियर की तरक्की और कंपनियों के लिए नवाचार और मुनाफे की कुंजी है. कंपनियों को अपने कर्मचारियों के विकास में निवेश करना चाहिए, और कर्मचारियों को भी सीखने के लिए उत्सुक रहना चाहिए. AI और डिजिटल युग कोई चुनौती नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर है जिसे हमें दोनों हाथों से थामना चाहिए. याद रखें, जो व्यक्ति सीखने को अपनी आदत बना लेता है, उसे कोई नहीं रोक सकता. यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की ज़रूरत है. अपनी आँखें, कान और दिमाग हमेशा खुले रखें, और आप देखेंगे कि सफलता आपके कदम चूमेगी.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: बदलती दुनिया में कर्मचारियों के लिए अपस्किलिंग और रीस्किलिंग क्यों इतनी ज़रूरी है?
उ: अरे दोस्तों, ये तो आजकल सबसे बड़ा सवाल है! मैंने खुद देखा है कि कैसे कुछ साल पहले जो हुनर हमें चैंपियन बनाता था, आज वो थोड़ा पुराना लगने लगा है. असल में, अपस्किलिंग (कौशल बढ़ाना) और रीस्किलिंग (नए कौशल सीखना) आजकल बस विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन गए हैं.
सोचो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन हर दिन नई चीज़ें सीख रहे हैं और हमारे काम करने के तरीके को बदल रहे हैं. अगर हम अपने कर्मचारियों को नए टूल्स और टेक्नोलॉजी से वाकिफ नहीं कराएंगे, तो वे बाज़ार में पिछड़ जाएंगे.
मुझे याद है एक बार मेरे एक दोस्त की कंपनी में AI आने के बाद कई लोगों को लगा कि उनकी नौकरी चली जाएगी, पर कंपनी ने उन्हें नई AI-आधारित स्किल्स सिखाईं और आज वे पहले से भी ज़्यादा प्रोडक्टिव हैं.
यह सिर्फ नौकरी बचाने की बात नहीं है, बल्कि नए अवसरों को पकड़ने और करियर में आगे बढ़ने की भी है. आजकल हर क्षेत्र में डिजिटल बदलाव हो रहे हैं और अगर हम समय के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे तो ये बदलाव हमें पीछे छोड़ सकते हैं.
यह हमें सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए भी तैयार करता है. कंपनियां भी समझ गई हैं कि अगर वे अपने कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षित नहीं करेंगी, तो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में दिक्कत होगी.
प्र: कंपनियों को अपस्किलिंग और रीस्किलिंग प्रोग्राम्स में निवेश करने से क्या फ़ायदे मिलते हैं?
उ: सच कहूँ तो, कंपनियों के लिए ये कोई खर्च नहीं बल्कि एक शानदार निवेश है! मैंने कई कंपनियों को देखा है जिन्होंने अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण में पैसा लगाया और उन्हें चौंकाने वाले फ़ायदे मिले.
सबसे पहले, जब कर्मचारी नए कौशल सीखते हैं, तो वे ज़्यादा प्रोडक्टिव हो जाते हैं. मतलब, वही लोग बेहतर और तेज़ी से काम कर पाते हैं. दूसरा, इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है.
सोचो, जब कंपनी आपके विकास पर ध्यान देती है, तो आपको कैसा महसूस होगा? आप ज़्यादा वफादार और प्रेरित महसूस करेंगे. तीसरा, इससे टर्नओवर कम होता है.
मैंने खुद सुना है कि जब कर्मचारियों को लगता है कि उनके पास सीखने और आगे बढ़ने का मौका है, तो वे नौकरी छोड़ने के बारे में कम सोचते हैं. इससे नई हायरिंग का खर्च बचता है और कंपनी को अनुभवी लोग मिलते रहते हैं.
इसके अलावा, कंपनी नए इनोवेशन के लिए भी तैयार रहती है. जब आपके पास ऐसे कर्मचारी हों जो नई टेक्नोलॉजी और चुनौतियों को समझने में सक्षम हों, तो आपकी कंपनी भी बाज़ार में सबसे आगे रहती है.
मुझे अपनी एक क्लाइंट कंपनी याद है, उन्होंने अपने सेल्स टीम को डेटा एनालिसिस सिखाया और उनका सेल्स ग्राफ आसमान छू गया!
प्र: एक कर्मचारी के रूप में, मैं खुद को कैसे अपस्किल और रीस्किल कर सकता हूँ ताकि भविष्य के लिए तैयार रहूँ?
उ: ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर उस इंसान को जानना चाहिए जो अपने करियर को लेकर गंभीर है! देखो दोस्तों, अपनी स्किल्स को अपडेट रखने की ज़िम्मेदारी सिर्फ कंपनी की नहीं, हमारी भी है.
मैंने अपनी आँखों से देखा है कि जो लोग खुद पर निवेश करते हैं, वे हमेशा चमकते हैं. आप ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं – आजकल Coursera, Udemy, LinkedIn Learning जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ढेरों बेहतरीन कोर्सेज़ उपलब्ध हैं, जिनमें से कई तो फ्री भी होते हैं.
अपनी फील्ड से जुड़ी नई टेक्नोलॉजी और ट्रेंड्स के बारे में किताबें पढ़ो, वेबिनार अटेंड करो. सबसे ज़रूरी बात, नेटवर्किंग करो! अपनी फील्ड के एक्सपर्ट्स से मिलो, उनसे सीखो.
मुझे याद है मैंने एक बार एक इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस अटेंड की थी, वहाँ मैंने जो सीखा वो किसी डिग्री से कम नहीं था. साथ ही, साइड प्रोजेक्ट्स पर काम करो. जैसे, अगर आप मार्केटिंग में हैं, तो अपनी एक छोटी वेबसाइट बनाओ या किसी छोटे बिज़नेस के लिए सोशल मीडिया मैनेज करो.
इससे आपको प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा. और हाँ, कभी सीखना बंद मत करना. ज़िंदगी भर एक स्टूडेंट बने रहना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है!






